Wednesday, January 30, 2013

वीर


Dedicated to all the brave men and women who protect our Nation!

जब सीना तान खड़े हैं हम
क्या मजाल जो सामने आ जाए
हम वोह चट्टान हैं
जो आंधी का भी रुख बदल दे

गर अपनी जगह पे कायम हैं हम
दुआ करो की हम थम जाएं
क्यूंकि गर ये शेर शिकार पे निकले
तो तुम्हारा नाम-ओ-निशान मिटा दें

लोहा बरसाओ गर हम पर
कोशिश करना की निशाना न चुके
क्यूंकि इन घायल बाजुओं में भी इतनी ताकत होगी
की उसी लोहे से तुम्हे फना कर दें

ये तिरंगा गुरुर है हमारा
ललकारने की गलती न करना
हमारा आक्रोश जंगल की वोह आग है
जो कुछ पल में ही तुम्हारी ज़िन्दगी बंजर कर दे

ये मुल्क ही हमारा मज़हब है
जहाँ के मौलवी हम ही हैं
मगर इस मज़हब पर गर आंच भी आई
तो याद रखना की यहाँ के जल्लाद भी हम ही हैं

हमारी आन पर ऊँगली उठाने वाले
एक बार इतिहास ज़रूर पलट कर देख
पता चलेगा की ऐसे लड़े थे हम
की अपनी हार पर भी दुश्मन नाज़ कर गया

फक्र हैं हमें जिस मिट्टी के लिए हम लड़ते हैं
हमें मिटाने के ख्याल पे ज़रा दुबारा गौर करना
हम वोह वीर हैं जो मौत से भी कह दें...
ज़रा ठहरो, अभी थोडा काम बाकी है



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