Sunday, October 19, 2014

सोचो ज़रा

दिल की ही बातों से लिखी जाती तो
कैसी होती ये दुनिया
मन की ही आँखों से पढ़ी जाती तो
कैसी होती ये दुनिया
सोचो ज़रा

इक उम्र साथ गुज़ारने की ख्वाहिश जो होती
और जो उन इरादों की पकड़ न पाती ये दुनिया
जो चाहें वो राह खुल जाती
और जो रोक न पाती ये दुनिया
सोचो ज़रा

खुले आसमां तले तमन्नाएं उड़ान जो भरतीं
और आँखें खुली देखती रेहती ये दुनिया
मंजिलों के पार ज़िद पकड़ कर ज़िन्दगी जो चलती
तो पीछे पीछे भागती ये दुनिया
सोचो ज़रा

ज़मीं से लिपट कर जो बिखरती गर
तो चुन चुन कर पिरोती ये दुनिया
जिनके सहारे ज़िन्दगी फिर खडी होती
कैसा होता जो ऐसे फरिश्तों से भरी होती ये दुनिया
सोचो ज़रा

तेहज़ीब–ऐ–फ़ितरत से मुलाक़ात जो करती
हए दिल को छू जाती ये दुनिया
किसी के ख़ुदी की इज्ज़त जो करती
तो यार अपनी एह्मियत ज़ाहिर कर जाती ये दुनिया
सोचो ज़रा

दिल की ही बातों से लिखी जाती तो
कैसी होती ये दुनिया
मन की ही आँखों से पढ़ी जाती तो
कैसी होती ये दुनिया

सोचो ज़रा

Thursday, January 2, 2014

आगे बढ़ चलो यारों

कुछ पाया कुछ खोया
कुछ बिखरा कुछ पिरोया
मगर न एहसास–ऐ–ख़ुशी और न इम्तेहान-ऐ-ग़म से रुको यारों
आगे बढ़ चलो यारों

बीते वक़्त का वो सफ़र सुहाना
ज़िन्दगी चली हो जैसे कोई अफसाना
वो सफ़र अब ख़त्म हो चला; अब कहीं और घूमो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

कोई सुबह हुई पर रौशनी नहीं थी
ज़िन्दगी लगने वीरानी लगी थी
होगी सेहर रौनक भरी; थोडा इंतज़ार करो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

सपने को हकीक़त में बदलने चले थे
कोशिश की दिल से मगर बिखरने लगे थे
नए सपनों से भर जाएंगी रातें; तबियत से एक नींद तो लो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

ज़िन्दगी कुछ नया लायी तुम्हारे लिए ही
नयी राहें खुली तुम्हारे लिए ही
खुद पर यकीन रख कर उस राह को पकड़ो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

आएंगी दिल में वो यादें बीती
उठेंगी मन में वो बातें बीती
कहना उन यादों से तुम; की अब तुम भी बढ़ो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

कुछ पाया कुछ खोया
कुछ बिखरा कुछ पिरोया
मगर न एहसास–ऐ–ख़ुशी और न इम्तेहान-ऐ-ग़म से रुको यारों

आगे बढ़ चलो यारों