वश में कोई जो न हो , मन
में कोई भय न हो
ऐसी कल्पना को सत्य में
उतार दो
न झुक सका है वो कभी , न डर
सका है वो कभी
ऐसी सूक्तियों# से खुद को उभार दो
दृढ जो विश्वास है , जीत का
आग़ाज़ है
बात है पते की तुम ये मान
लो
एक जो दबंग है , भेड़ उसी के
संग है
जीवन का है सत्य तुम ये जान
लो
हो नदी की धार , या हो धार का
बिखार
तुम चनाव लो
बाज़ की उड़ान हो , या बाज़ का
शिकार हो
क्या हो तुम ये आज ये चुनाव
लो
चोट से भी पस्त नहीं ,
मिटाने से भी ध्वस्त नहीं
इस कला से खुद को निखार दो
मुश्किलों से जो लड़ाए , आहतो## में जो हसाए
उस हसी से दुःख को उभार दो
सत्य थाम जो चला है , गिर
के फिर जो उठ खड़ा है
ऐसे बल से आज खुद को ढाल लो
गीत जो सिखा गया कुछ , मन
को सुझा गया कुछ
ऐसे गीत की पकड़ तुम वो ताल लो
वश में कोई जो न हो , मन
में कोई भय न हो
ऐसी कल्पना को सत्य में
उतार दो
न झुक सका है वो कभी , न डर
सका है वो कभी
ऐसी सूक्तियों# से खुद को उभार दो
# सूक्तियां – a
saying
## आहत – injured
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