Thursday, January 2, 2014

आगे बढ़ चलो यारों

कुछ पाया कुछ खोया
कुछ बिखरा कुछ पिरोया
मगर न एहसास–ऐ–ख़ुशी और न इम्तेहान-ऐ-ग़म से रुको यारों
आगे बढ़ चलो यारों

बीते वक़्त का वो सफ़र सुहाना
ज़िन्दगी चली हो जैसे कोई अफसाना
वो सफ़र अब ख़त्म हो चला; अब कहीं और घूमो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

कोई सुबह हुई पर रौशनी नहीं थी
ज़िन्दगी लगने वीरानी लगी थी
होगी सेहर रौनक भरी; थोडा इंतज़ार करो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

सपने को हकीक़त में बदलने चले थे
कोशिश की दिल से मगर बिखरने लगे थे
नए सपनों से भर जाएंगी रातें; तबियत से एक नींद तो लो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

ज़िन्दगी कुछ नया लायी तुम्हारे लिए ही
नयी राहें खुली तुम्हारे लिए ही
खुद पर यकीन रख कर उस राह को पकड़ो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

आएंगी दिल में वो यादें बीती
उठेंगी मन में वो बातें बीती
कहना उन यादों से तुम; की अब तुम भी बढ़ो यारों
आगे बढ़ चलो यारों

कुछ पाया कुछ खोया
कुछ बिखरा कुछ पिरोया
मगर न एहसास–ऐ–ख़ुशी और न इम्तेहान-ऐ-ग़म से रुको यारों

आगे बढ़ चलो यारों