Sunday, March 17, 2013

खुद को उभार दो

 


वश में कोई जो न हो , मन में कोई भय न हो
ऐसी कल्पना को सत्य में उतार दो
न झुक सका है वो कभी , न डर सका है वो कभी
ऐसी सूक्तियों# से खुद को उभार दो


दृढ जो विश्वास है , जीत का आग़ाज़ है
बात है पते की तुम ये मान लो
एक जो दबंग है , भेड़ उसी के संग है
जीवन का है सत्य तुम ये जान लो


हो नदी की धार , या हो धार का बिखार
तुम चनाव लो
बाज़ की उड़ान हो , या बाज़ का शिकार हो
क्या हो तुम ये आज ये चुनाव लो


चोट से भी पस्त नहीं , मिटाने से भी ध्वस्त नहीं
इस कला से खुद को निखार दो
मुश्किलों से जो लड़ाए , आहतो## में जो हसाए
उस हसी से दुःख को उभार दो


सत्य थाम जो चला है , गिर के फिर जो उठ खड़ा है
ऐसे बल से आज खुद को ढाल लो
गीत जो सिखा गया कुछ , मन को सुझा गया कुछ
ऐसे गीत की पकड़ तुम वो ताल लो


वश में कोई जो न हो , मन में कोई भय न हो
ऐसी कल्पना को सत्य में उतार दो
न झुक सका है वो कभी , न डर सका है वो कभी
ऐसी सूक्तियों# से खुद को उभार दो



# सूक्तियां – a saying
## आहत – injured

Wednesday, January 30, 2013

वीर


Dedicated to all the brave men and women who protect our Nation!

जब सीना तान खड़े हैं हम
क्या मजाल जो सामने आ जाए
हम वोह चट्टान हैं
जो आंधी का भी रुख बदल दे

गर अपनी जगह पे कायम हैं हम
दुआ करो की हम थम जाएं
क्यूंकि गर ये शेर शिकार पे निकले
तो तुम्हारा नाम-ओ-निशान मिटा दें

लोहा बरसाओ गर हम पर
कोशिश करना की निशाना न चुके
क्यूंकि इन घायल बाजुओं में भी इतनी ताकत होगी
की उसी लोहे से तुम्हे फना कर दें

ये तिरंगा गुरुर है हमारा
ललकारने की गलती न करना
हमारा आक्रोश जंगल की वोह आग है
जो कुछ पल में ही तुम्हारी ज़िन्दगी बंजर कर दे

ये मुल्क ही हमारा मज़हब है
जहाँ के मौलवी हम ही हैं
मगर इस मज़हब पर गर आंच भी आई
तो याद रखना की यहाँ के जल्लाद भी हम ही हैं

हमारी आन पर ऊँगली उठाने वाले
एक बार इतिहास ज़रूर पलट कर देख
पता चलेगा की ऐसे लड़े थे हम
की अपनी हार पर भी दुश्मन नाज़ कर गया

फक्र हैं हमें जिस मिट्टी के लिए हम लड़ते हैं
हमें मिटाने के ख्याल पे ज़रा दुबारा गौर करना
हम वोह वीर हैं जो मौत से भी कह दें...
ज़रा ठहरो, अभी थोडा काम बाकी है



Saturday, January 12, 2013

कुछ भी




गज़ब है इंसान
कुछ भी करता है

शादी किसी की हो
रिश्तेदारी किसी की हो
मगर एक जरुर होगा जो कहेगा
यार नान कच्चे थे

सामान किसी ने खरीदा
पैसे किसी के लगे
मगर एक ज़रूर होगा जो कहेगा
यार इससे सस्ता मैं दिलवा देता

काम किसी का रुका
परेशां कोई हुआ
मगर एक ज़रूर होगा जो कहेगा
यार पहले कहा होता तो मैं करवा देता

दिल पे चोट किसी ने खायी
सह रहा है कोई रुसवाई           
मगर एक ज़रूर होगा जो कहेगा
कुछ भी कहो, गलती तो तेरी थी

लड़ाई किसी की हुई
पिटाई किसी की हुई
मगर एक ज़रूर होगा जो कहेगा
उसकी जगह मैं होता, तो छोड़ता ना

जीत किसी की हुई
हार किसी की हुई
मगर एक ज़रूर होगा जो कहेगा
मैं होता तो धूम मचा देता

गज़ब है इंसान
कुछ भी करता है