Sunday, December 16, 2012

क्या हुआ




क्या हुआ जो मायूस है तू आज
पतझड़ के उस पेड़ से सीख
सुखा खड़ा है लेकिन जानता है की
बहार1 अभी दूर नहीं

क्या हुआ जो ज़ख़्मी है तू
समन्दर किनारे उस चट्टान से सीख
मार ही खायी है उसने हमेशा
मगर कभी टूटी नहीं

क्या हुआ जो समाज ने एहमियत2 न दी तुझे
फूलों पर मंडराते उस भौंरे से सीख
संसार भले ही न पहचाने उसके अस्तित्व को, मगर वोह जानता है की
उसके बिना संसार का अस्तित्व नहीं*

क्या हुआ जो अकेला पड गया तू
आसमान में चमकते उस सूरज से सीख
अकेला ही है वो हमेशा
और उसे किसी की ज़रूरत भी नहीं

इसलिए अब अपनी बेबसी का रोना बंद कर तू
नज़रें उठा के दुनिया को देखएगा
तो जानेगा
की तुझसे भी ज्यादा बेबस है कोई कहीं


 बहार -> spring season
2एहमियत -> Importance
* it is a saying that when all the bees in the world will die, the world will come to an end.

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