लगता हूँ पत्थर जितना सख्त,
अन्दर से मोम जितना नर्म हूँ मैं.
लगता हूँ तुम्हे कभी किसी दुश्मन जितना कठोर,
अन्दर से माँ की ममता जितना कोमल हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
गरजता हूँ तुमपे कभी कभी बिजली की तरह,
गुस्सा ही नज़र आता होगा तुम्हें मेरा.
अगर दिल से समझोगे तो पता चलेगा तुम्हे,
की गुस्से से प्यार जताता हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
तुम्हे चलना सिखाया जब,
शायद तुम्हारा सबसे करीबी दोस्त था मैं.
और अब दोस्तों के सामने मेरा आना तुम्हें गवारा नहीं.
दुःख होता है लेकिन तुम अब बड़े हो गए हो,
ये सोचकर मुस्करा देता हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
कहूँ तुम्हे अब ऊंची आवाज़ में,
तो गवारा नहीं होता तुम्हे.
तुम गलत रास्ते पे ना जाओ इस लिए
कभी सख्ती से तुम्हे समझाऊं,
शायद इतना तो हक रखता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
हाथ उठाया जब मैंने तुमपर,
तुमने सोचा की प्यार नहीं मुझे तुमसे.
माँ की ममता नज़र आई तुम्हे तब,
पर नहीं देखा की अन्दर ही अन्दर रोया हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
कह नहीं पाता तुम से,
शायद ये ही गलती करता हूँ मैं.
लेकिन तुम समझोगे की
तुम से अज़ीज़ कोई नहीं मेरे लिए,
ये ही उम्मीद रखता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
जो मुझे न मिल पाया,
वो सब तुम्हें दूँ.
तुम्हारी हर ख्वाइश को पूरा करूँ,
खुशियों को तुमसे कभी ना अलग होने दूँ,
जिंदगी की मुश्किलें तम्हारे लिए आसान करूँ,
जब भी तुम्हे ज़रूरत हो मेरी, तुम्हारे पास रहूँ,
इस लिए तो जीता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
ये देख कर की अपने पैरों पे खड़े हो तुम,
इससे ज्यादा ख़ुशी कभी नहीं हुई मुझे.
ये देखकर की अच्छे बुरे की समझ है तुम्हे,
इतना सुकून शायद कभी नहीं मिला मुझे.
इसी तरह तुम आबाद रहो,
रोज़ रात को यही दुआ करता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
ज़िन्दगी का एक नया सफ़र शुरू करोगे तुम,
जब पिता बनोगे तुम.
अपने अंश को पहली बार जब देखोगे,
तो एक अनकही ख़ुशी में खो जाओगे तुम.
एक नई ज़िन्दगी को अपने हाथों में जब थामोगे,
अपने ज़ज्बातों को शायद रोक नहीं पाओगे तुम.
जिस रिश्ते को शुरू करोगे तुम तब,
उसी रिश्ते को इतने सालों जीता आया हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
उसकी तकलीफों को जब तुम अपना बनाओगे,
ज़िम्मेदारी का एहसास तुम्हे तब समझ आएगा.
शाम को उसके पसंद की चीज़ जब तुम घर लाओगे,
ख़ुशी का मतलब तब तुम्हें समझ आएगा.
रात को सोते हुए उसके चेहरे पे तुम
हलकी सी मुस्कराहट जब देखोगे,
सुकून का मतलब तुम्हे तब समझ आएगा.
मेरी ज़िन्दगी की सीख अगर तब तुम्हारे काम आई,
तो ही अपनी ज़िन्दगी पूरी कर पाऊंगा मैं.
पिता हूँ मैं.
लगता हूँ तुम्हे कभी किसी दुश्मन जितना कठोर,
अन्दर से माँ की ममता जितना कोमल हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
गरजता हूँ तुमपे कभी कभी बिजली की तरह,
गुस्सा ही नज़र आता होगा तुम्हें मेरा.
अगर दिल से समझोगे तो पता चलेगा तुम्हे,
की गुस्से से प्यार जताता हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
तुम्हे चलना सिखाया जब,
शायद तुम्हारा सबसे करीबी दोस्त था मैं.
और अब दोस्तों के सामने मेरा आना तुम्हें गवारा नहीं.
दुःख होता है लेकिन तुम अब बड़े हो गए हो,
ये सोचकर मुस्करा देता हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
कहूँ तुम्हे अब ऊंची आवाज़ में,
तो गवारा नहीं होता तुम्हे.
तुम गलत रास्ते पे ना जाओ इस लिए
कभी सख्ती से तुम्हे समझाऊं,
शायद इतना तो हक रखता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
हाथ उठाया जब मैंने तुमपर,
तुमने सोचा की प्यार नहीं मुझे तुमसे.
माँ की ममता नज़र आई तुम्हे तब,
पर नहीं देखा की अन्दर ही अन्दर रोया हूँ मैं.
पिता हूँ मैं.
कह नहीं पाता तुम से,
शायद ये ही गलती करता हूँ मैं.
लेकिन तुम समझोगे की
तुम से अज़ीज़ कोई नहीं मेरे लिए,
ये ही उम्मीद रखता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
जो मुझे न मिल पाया,
वो सब तुम्हें दूँ.
तुम्हारी हर ख्वाइश को पूरा करूँ,
खुशियों को तुमसे कभी ना अलग होने दूँ,
जिंदगी की मुश्किलें तम्हारे लिए आसान करूँ,
जब भी तुम्हे ज़रूरत हो मेरी, तुम्हारे पास रहूँ,
इस लिए तो जीता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
ये देख कर की अपने पैरों पे खड़े हो तुम,
इससे ज्यादा ख़ुशी कभी नहीं हुई मुझे.
ये देखकर की अच्छे बुरे की समझ है तुम्हे,
इतना सुकून शायद कभी नहीं मिला मुझे.
इसी तरह तुम आबाद रहो,
रोज़ रात को यही दुआ करता हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
ज़िन्दगी का एक नया सफ़र शुरू करोगे तुम,
जब पिता बनोगे तुम.
अपने अंश को पहली बार जब देखोगे,
तो एक अनकही ख़ुशी में खो जाओगे तुम.
एक नई ज़िन्दगी को अपने हाथों में जब थामोगे,
अपने ज़ज्बातों को शायद रोक नहीं पाओगे तुम.
जिस रिश्ते को शुरू करोगे तुम तब,
उसी रिश्ते को इतने सालों जीता आया हूँ मैं,
पिता हूँ मैं.
उसकी तकलीफों को जब तुम अपना बनाओगे,
ज़िम्मेदारी का एहसास तुम्हे तब समझ आएगा.
शाम को उसके पसंद की चीज़ जब तुम घर लाओगे,
ख़ुशी का मतलब तब तुम्हें समझ आएगा.
रात को सोते हुए उसके चेहरे पे तुम
हलकी सी मुस्कराहट जब देखोगे,
सुकून का मतलब तुम्हे तब समझ आएगा.
मेरी ज़िन्दगी की सीख अगर तब तुम्हारे काम आई,
तो ही अपनी ज़िन्दगी पूरी कर पाऊंगा मैं.
पिता हूँ मैं.
Such a heartfelt account of a father's feelings !
ReplyDeletethanks Rahul for penning such pure thoughts :)
Very well witten☺
ReplyDelete